पूजा के दौरान मंत्र जप क्यों करते हैं?
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मंत्र जप क्यों: गीता 10.25 — 'यज्ञों में मैं जपयज्ञ हूँ।' मनुस्मृति: 'जप सर्वश्रेष्ठ यज्ञ।' जप से मन एकाग्र, मस्तिष्क सक्रिय, पाप नाश और रक्षा। तीन प्रकार: वाचिक < उपांशु (10x) < मानस (100x)। मानस जप सर्वश्रेष्ठ।
- 1मन की एकाग्रता — एक मंत्र पर ध्यान लगाने से मन शांत
- 2ध्वनि कंपन — संस्कृत मंत्रों की विशेष frequency से मस्तिष्क सक्रिय
- 3संस्कार — नित्य जप से मन में देव का स्वरूप बैठता है
- 4पाप क्षय — मंत्र जप से पापों का नाश
- 5रक्षा — मंत्र कवच की तरह रक्षा करता है
- 6वाचिक — मुख से बोलकर (प्रारंभिक साधक)
- 7उपांशु — होंठ हिलाकर, ध्वनि न निकले (मध्यम)
- 8मानस — मन में (श्रेष्ठ)
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