प्रारब्ध कर्म को बदला जा सकता है या नहीं?
की चेकलिस्ट
मंद प्रारब्ध पुरुषार्थ से बदला जा सकता है, तीव्र गुरु कृपा से टल सकता है, पर दृढ़ प्रारब्ध भोगना ही पड़ता है। भक्ति/ज्ञान से तीव्रता कम हो सकती है। सबसे महत्वपूर्ण — वर्तमान कर्म (क्रियमाण) से भविष्य सुधारें।
- 1मंद प्रारब्ध — हल्का, जिसे पुरुषार्थ (वैदिक उपाय) से बदला जा सकता है।
- 2तीव्र प्रारब्ध — कठिन, जो पुरुषार्थ और संत/गुरु कृपा से टल सकता है या कम हो सकता है।
- 3तीव्रतर (दृढ़) प्रारब्ध — अत्यंत कठोर, जो होकर ही रहता है — इसे भोगना ही पड़ता है।
सम्पूर्ण उत्तर
विस्तृत प्रश्न पृष्ठ देखें
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
श्रेणी
कर्म सिद्धांत
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।