प्रयागराज संगम स्नान का क्या विशेष महत्व है
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प्रयागराज त्रिवेणी संगम (गंगा-यमुना-सरस्वती) तीर्थराज है। ब्रह्मपुराण: संगम स्नान = अश्वमेध यज्ञ फल। मत्स्यपुराण: माघ में स्नान = 10,000 तीर्थ यात्रा। पद्मपुराण: मोक्ष प्रदायक। तीन डुबकी — पापनाश, पितृ शान्ति, परिवार कल्याण। कुंभ/महाकुंभ में स्नान सर्वोत्तम।
- 1पहली: स्वयं के पाप नाश हेतु।
- 2दूसरी: पितरों की आत्मा की शान्ति हेतु।
- 3तीसरी: परिवार की सुख-समृद्धि हेतु।
- 4कुंभ/महाकुंभ: 12 वर्ष में एक बार (महाकुंभ 144 वर्ष में)। कुंभ का आधार खगोलीय — जब बृहस्पति वृषभ राशि में और सूर्य मकर राशि में हों।
- 5माघ मेला: माघ मास में (जनवरी-फरवरी)।
- 6मकर संक्रान्ति, मौनी अमावस्या, बसन्त पंचमी, माघ पूर्णिमा — ये विशेष स्नान तिथियाँ हैं।
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तीर्थ स्नान
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