सपिण्डीकरण संस्कार क्या है?
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सपिण्डीकरण = प्रतीकात्मक अनुष्ठान जिसमें पके चावल, दूध, काले तिल से बने पिण्डों को मिलाकर जीवात्मा को प्रेत कोटि से पितृ कोटि में सम्मिलित किया जाता है। इसके बाद ही आत्मा पितृलोक जाती है और श्राद्ध की अधिकारी बनती है।
- 1पके हुए चावल
- 2काले तिल
- 3इन सामग्रियों से पिण्ड बनाए जाते हैं।
- 4फिर उन पिण्डों को मिलाकर यह अनुष्ठान संपन्न होता है।
- 5'सपिण्डीकरण' = 'सम + पिण्ड + करण' = पिण्डों का सम्मिलन।
- 6यह दर्शाता है कि नई आत्मा अब पुराने पितरों के साथ एक हो रही है।
- 7मृत्यु के बाद जीवात्मा प्रेत रूप में भटकती है।
- 8सपिण्डीकरण से ही उसे प्रेत अवस्था से मुक्ति मिलती है।
- 9इस संस्कार के पश्चात् ही जीवात्मा पितृलोक की यात्रा आरंभ करती है।
- 10सपिण्डीकरण के बाद ही जीवात्मा श्राद्ध का अधिकार प्राप्त करती है।
- 11अर्थात् सपिण्डीकरण से पहले श्राद्ध का प्रभाव अधूरा रहता है।
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