शिव के पार्थिव लिंग बनाने की विधि और मंत्र क्या है?
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पार्थिव लिंग: नदी मिट्टी + गंगाजल → अण्डाकार लिंग → 'ॐ नमः शिवाय' जपते हुए बनाएँ। 1/3/5/11/108/1008 संख्या। स्थापना: 'ॐ शिवलिंगाय नमः'। जल-बेलपत्र-पुष्प पूजन → विसर्जन (जलाशय)। स्वयं ईश्वर निर्माण = सर्वोच्च भक्ति।
- 1मिट्टी: नदी तट की शुद्ध मिट्टी, या गोमय (गोबर) मिश्रित मिट्टी। काली मिट्टी, बालू मिट्टी भी उचित। अशुद्ध (कीड़ों वाली, गंदी) मिट्टी वर्जित।
- 2जल मिश्रण: शुद्ध जल (गंगाजल उत्तम) से मिट्टी गूँथें।
- 3आकार: हाथों से अण्डाकार (egg-shaped) शिवलिंग बनाएँ। आकार छोटा-बड़ा कोई भी हो सकता है — अंगूठे के बराबर से लेकर मुट्ठी भर तक।
- 4संख्या: 1, 3, 5, 11, 21, 108, 1008 — पार्थिव लिंग। सावन या शिवरात्रि पर 1008 पार्थिव लिंग बनाकर पूजा = अत्यंत पुण्यदायी।
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