विस्तृत उत्तर
पार्थिव (मिट्टी का) शिवलिंग बनाकर पूजा करना शिव पूजा की अत्यंत प्राचीन और पुण्यदायी विधि है। शिव पुराण में पार्थिव पूजा को सर्वश्रेष्ठ पूजाओं में गिना गया है।
पार्थिव लिंग बनाने की विधि
- 1मिट्टी: नदी तट की शुद्ध मिट्टी, या गोमय (गोबर) मिश्रित मिट्टी। काली मिट्टी, बालू मिट्टी भी उचित। अशुद्ध (कीड़ों वाली, गंदी) मिट्टी वर्जित।
- 1जल मिश्रण: शुद्ध जल (गंगाजल उत्तम) से मिट्टी गूँथें।
- 1आकार: हाथों से अण्डाकार (egg-shaped) शिवलिंग बनाएँ। आकार छोटा-बड़ा कोई भी हो सकता है — अंगूठे के बराबर से लेकर मुट्ठी भर तक।
- 1संख्या: 1, 3, 5, 11, 21, 108, 1008 — पार्थिव लिंग। सावन या शिवरात्रि पर 1008 पार्थिव लिंग बनाकर पूजा = अत्यंत पुण्यदायी।
मंत्र
- ▸लिंग बनाते समय: 'ॐ नमः शिवाय' निरंतर जपें।
- ▸स्थापना मंत्र: 'ॐ ह्रौं नमः शिवाय। ॐ शिवलिंगाय नमः।'
- ▸प्राण प्रतिष्ठा: 'ॐ आं ह्रीं क्रौं... (शिव प्राण प्रतिष्ठा मंत्र)'
पूजा विधि
प्रत्येक पार्थिव लिंग पर जल, बेलपत्र, पुष्प, अक्षत, धूप, दीप → 'ॐ नमः शिवाय' → प्रणाम।
विसर्जन: पूजा के बाद पार्थिव लिंग को जलाशय (नदी/तालाब) में विसर्जित करें। मिट्टी का होने से पर्यावरण को कोई हानि नहीं।
विशेष: पार्थिव पूजा इसलिए श्रेष्ठ है क्योंकि भक्त स्वयं अपने हाथों से ईश्वर का निर्माण करता है — यह सर्वोच्च भक्ति और समर्पण का प्रतीक है।





