शिव पूजा में नियमितता का क्या महत्व है?
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नियमितता = सबसे महत्वपूर्ण। शिव पुराण: अखंड साधक कदापि विफल नहीं। पतंजलि: दीर्घकाल+निरंतर+श्रद्धा = दृढ़ अभ्यास। 'अल्प किन्तु नित्य' सिद्धांत अपनाएं। एक ही समय, कम से कम एक माला जप नित्य। अनियमितता से मंत्र शक्ति क्षीण। व्यस्तता में मानसिक जप जारी रखें।
- 1शिव पुराण: 'अखंड जप-साधना करने वाला साधक कदापि विफल नहीं होता।' नियमित पूजा शिव को सबसे अधिक प्रिय है।
- 2पतंजलि योग सूत्र: 'स तु दीर्घकालनैरन्तर्यसत्कारासेवितो दृढभूमिः' — अभ्यास दीर्घकाल तक, निरंतर और श्रद्धापूर्वक किया जाए तो दृढ़ हो जाता है।
- 3भगवद्गीता (12.10): 'अभ्यासयोगेन' — अभ्यास योग से ईश्वर प्राप्ति।
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