शिव साधना में मौन व्रत का क्या महत्व है?
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शिव = मौन और चेतना का स्वरूप (कश्मीर शैव दर्शन)। मौन से: वाक् शक्ति संचय, मन एकाग्र, आत्मनिरीक्षण, कर्म बंधन क्षय, वाणी दोष निवारण। दक्षिणामूर्ति शिव = मौन ज्ञान का प्रतीक। मौनी अमावस्या/महाशिवरात्रि पर विशेष फलदायी। 'मुनि' शब्द 'मौन' से ही उत्पन्न।
- 1सूर्योदय से सूर्यास्त तक (या 24 घंटे) मौन रहें।
- 2मौन काल में मानसिक जप ('ॐ नमः शिवाय') जारी रखें।
- 3इशारों या लिखकर भी संवाद न करें (पूर्ण मौन)।
- 4मौन काल में ध्यान, प्राणायाम और शिव चिंतन करें।
- 5महाशिवरात्रि, सावन सोमवार या मौनी अमावस्या पर मौन व्रत विशेष फलदायी।
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शिव साधना
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