शिवलिंग पर जल चढ़ाने का नियम क्या है?
की चेकलिस्ट
तांबे के लोटे से गंगाजल या शुद्ध जल, 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र के साथ शिवलिंग पर धीमी धारा में अर्पित करें। जलहरी को न लांघें और शिवलिंग की आधी परिक्रमा (बाईं ओर) करें।
- 1जल का प्रकार: गंगाजल सर्वश्रेष्ठ है। इसके अभाव में स्वच्छ नदी जल, वर्षा जल या सामान्य शुद्ध जल उपयोग करें।
- 2पात्र: तांबे के लोटे से जल चढ़ाना शुभ है। लोहे का पात्र वर्जित है।
- 3दिशा: शिवलिंग के सामने (उत्तर या पूर्व दिशा) खड़े होकर जल अर्पित करें।
- 4धारा: जल की धारा निरंतर व मध्यम गति से चढ़ाएं — न अत्यधिक तेज, न बूंद-बूंद।
- 5मंत्र: जल अर्पण करते समय 'ॐ नमः शिवाय' या 'ॐ जलधाराभिषेकेण शिवं प्रीणामि' बोलें।
- 6सोमवार विशेष: सोमवार को जलाभिषेक का विशेष महत्व है — इस दिन प्रातःकाल जल चढ़ाने से शिव प्रसन्न होते हैं।
- 7प्रतिबंध: शिवलिंग के सामने से (जलहरी के मुख की ओर से) जल न लांघें — यह अपवित्र माना जाता है।
- 8जलहरी का सम्मान: जल हमेशा जलहरी (योनिपीठ) के मुख की दिशा में बहना चाहिए — इसे न लांघें, बल्कि बाईं ओर से प्रदक्षिणा करें (आधी परिक्रमा)।
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