शिवलिंग पर जलधारा किस दिशा से गिरनी चाहिए और क्यों?
की चेकलिस्ट
शिवलिंग पर जलधारा उत्तर दिशा से गिरनी चाहिए। पूर्व दिशा से कभी न चढ़ाएं (शिव का मुख्य द्वार)। जलधारी का मुख उत्तर में हो। तांबे/कांसे के लोटे से छोटी धारा में अर्पित करें। शंख या लोहे के पात्र से जल वर्जित। सोमसूत्र का जल कभी न लांघें।
- 1तांबे के लोटे से छोटी धारा के रूप में जल अर्पित करें।
- 2जल एक बार में न उंडेलें — धीरे-धीरे अर्पित करें।
- 3शंख से जल कभी न चढ़ाएं (शंखचूड़ वध के कारण)।
- 4लोहे या स्टील के बर्तन से जल न चढ़ाएं — कांसे, तांबे, पीतल या अष्टधातु का पात्र ही प्रयोग करें।
- 5अभिषेक के बाद जलधारी से निकलने वाला जल कभी न लांघें।
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