शिवलिंग पर कर्पूर जलाने का आध्यात्मिक अर्थ क्या है?
की चेकलिस्ट
कर्पूर जलाने का अर्थ: अहंकार का पूर्ण विसर्जन (कपूर बिना अवशेष जलता है = अहं शिव में विलीन)। 'कर्पूरगौरं' — शिव की श्वेत ज्योति का प्रतीक। अज्ञान नाश, ज्ञान प्रकाश। स्कन्द पुराण: 108 यज्ञ फल। जीवात्मा का परमात्मा में विलय = मोक्ष प्रतीक। शिव आरती में कर्पूर अनिवार्य।
- 1शुद्ध कर्पूर (एडिबल/पूजा ग्रेड) ही प्रयोग करें।
- 2कर्पूर शिवलिंग के समक्ष या तांबे/पीतल की थाली में जलाएं।
- 3आरती करते समय 'ॐ जय शिव ओंकारा' या 'कर्पूरगौरं करुणावतारं' मंत्र का जप करें।
- 4कर्पूर की ज्योति के ऊपर हाथ रखकर माथे और आंखों को स्पर्श करें — इससे दिव्य शक्ति शरीर में प्रवेश करती है।
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