शिवरात्रि व्रत में फलाहार कब करना चाहिए?
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शिवरात्रि फलाहार: आदर्श = निर्जला। प्रातःकाल एक बार फलाहार (फल, दूध, साबूदाना)। रात्रि प्रहरों के बीच दूध/फल ले सकते हैं। अगले दिन पारण। अन्न-प्याज-लहसुन वर्जित। रात्रि जागरण प्रधान — कम से कम 1 प्रहर अवश्य जागें।
- 1प्रातःकाल (व्रत दिवस): शिवरात्रि के दिन प्रातःकाल एक बार फलाहार कर सकते हैं — फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू, मखाने आदि।
- 2प्रहर पूजा के बीच: रात्रि चार प्रहर की पूजा होती है। दो प्रहरों के बीच के अंतराल में दूध या फल ले सकते हैं।
- 3अगले दिन पारण: शिवरात्रि के अगले दिन (चतुर्दशी/अमावस्या) प्रातःकाल स्नान करके शिव पूजा के बाद पारण करें।
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