श्राद्ध कर्म क्यों किया जाता है?
की चेकलिस्ट
तीन ऋणों (देव/ऋषि/पितृ) में से पितृ ऋण से मुक्ति का एकमात्र मार्ग = श्राद्ध। पितरों को तृप्ति, वंशजों को आयु/संतान/धन/विद्या/मोक्ष का आशीर्वाद। न करने पर पितृ दोष = संतान-हीनता, दरिद्रता, व्याधि।
- 1देव ऋण
- 2ऋषि ऋण
- 3पितृ ऋण
- 4तीनों ऋणों में से 'पितृ ऋण' से मुक्ति का एकमात्र शास्त्र-सम्मत मार्ग = श्राद्ध।
- 5इसके बिना मनुष्य पितरों के ऋण से कभी मुक्त नहीं हो सकता।
- 6श्राद्ध से पितरों को कल्याण और तृप्ति प्राप्त होती है।
- 7उनकी जो भी योनि हो (देव, असुर, पशु, सर्प) — श्राद्ध का अंश उन तक उसी रूप में पहुँचता है।
- 8तृप्त पितर अपने वंशजों को आयु, संतान, धन, विद्या, स्वर्ग, मोक्ष, सुख, राज्य — आठ अमूल्य संपदाएं प्रदान करते हैं।
- 9श्राद्ध न करने वाला व्यक्ति 'पितृ दोष' का भागी बनता है।
- 10परिणाम: संतान-हीनता, दरिद्रता, गंभीर शारीरिक व्याधियाँ।
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