का सरल उत्तर
तीन ऋणों (देव/ऋषि/पितृ) में से पितृ ऋण से मुक्ति का एकमात्र मार्ग = श्राद्ध। पितरों को तृप्ति, वंशजों को आयु/संतान/धन/विद्या/मोक्ष का आशीर्वाद। न करने पर पितृ दोष = संतान-हीनता, दरिद्रता, व्याधि।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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