सोहम का अर्थ क्या है आध्यात्मिक रूप से?
की चेकलिस्ट
सोऽहम् = 'वह (ब्रह्म) मैं हूँ।' अजपा मंत्र — हर श्वास में स्वतः गूंजता है (सो = श्वास अंदर, हम = बाहर)। अद्वैत अनुभव: आत्मा = ब्रह्म। उलटा = 'हंसः' — इसलिए ज्ञानी 'परमहंस'। ईशोपनिषद, हंसोपनिषद में वर्णित।
- 1आत्मा = ब्रह्म — मेरे अंदर जो शुद्ध चेतना है, वही सर्वव्यापक ब्रह्म है।
- 2जीव-ईश्वर एकता — 'सोहम' अद्वैत का अनुभव है — जीवात्मा और परमात्मा एक ही हैं।
- 3हंस — 'सोहम' को उलटा पढ़ें = 'हंसः' (हंस)। परमहंस = जिसने 'सोहम' का बोध कर लिया। इसलिए उन्नत साधकों को 'परमहंस' कहा जाता है।
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