तांत्रिक साधना में गुरु का होना क्यों अनिवार्य है?
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कुलार्णव: 'गुरु बिना मंत्र नहीं।' कारण: मंत्र चैतन्य (गुरु जागृत करें), सूक्ष्म विधि (भूल=गंभीर), शक्ति हस्तांतरण (परंपरा), सुरक्षा कवच (उग्र शक्तियां), अनुभव (ग्रंथ≠अनुभव)। गुरु गीता: 'गु=अंधकार, रु=प्रकाश।'
- 1मंत्र चैतन्य: बिना दीक्षा मंत्र 'निद्रित' (सोया) — गुरु प्राण डालकर जागृत करते हैं।
- 2सूक्ष्म ज्ञान: तांत्रिक विधि = अत्यंत सूक्ष्म — एक भूल = गंभीर परिणाम। गुरु सही मार्ग दिखाते हैं।
- 3शक्ति हस्तांतरण: तंत्र = शक्ति विद्या — शक्ति गुरु→शिष्य परंपरा से प्रवाहित।
- 4सुरक्षा कवच: तांत्रिक साधना में उग्र शक्तियां — गुरु कृपा = सुरक्षा कवच।
- 5अनुभव: ग्रंथ = सिद्धांत। गुरु = अनुभव + मार्गदर्शन।
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तंत्र शास्त्र
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