तंत्र में कुल पूजा और समय पूजा में क्या अंतर है?
की चेकलिस्ट
समय पूजा: आन्तरिक — षट्चक्रों में ध्यान, कुंडलिनी योग, सात्विक, मोक्ष-प्रधान (शंकराचार्य परम्परा)। कुल पूजा: बाह्य+आन्तरिक — यंत्र, हवन, पंचमकार सम्भव, भोग+मोक्ष (कुलार्णव तंत्र)। अभिनवगुप्त: दोनों का चरम लक्ष्य एक — शिव-शक्ति ऐक्य।
- 1ध्यान-प्रधान साधना
- 2कुंडलिनी शक्ति को मूलाधार से सहस्रार तक ले जाना
- 3पूर्णतः सात्विक — पंचमकार का कोई स्थान नहीं
- 4शंकराचार्य परम्परा इसी को श्रेष्ठ मानती है
- 5'सौन्दर्यलहरी' (शंकराचार्य) समयाचार का प्रमुख ग्रंथ
- 6बाह्य पूजा-प्रधान (यंत्र, हवन, द्रव्य)
- 7पंचमकार (पाँच 'म') सम्मिलित हो सकते हैं
- 8कुल = परिवार/परम्परा — गुरु-शिष्य कुल-परम्परा में साधना
- 9कुलार्णव तंत्र इसका प्रमुख ग्रंथ
- 10भोग और मोक्ष दोनों का समन्वय
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तंत्र साधना
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