तंत्र में कुंडली दोष निवारण कैसे किया जाता है?
की चेकलिस्ट
कुंडली दोष तांत्रिक निवारण: मंगल दोष — हनुमान चालीसा + मंगल मंत्र। काल सर्प — नागबलि + राहु-केतु मंत्र। शनि — शनि मंत्र 23,000 + हनुमान चालीसा। पितृ — तर्पण + श्राद्ध। सर्वदोष — नवग्रह यंत्र + रुद्राभिषेक। योग्य ज्योतिषी से परामर्श अनिवार्य।
- 1हनुमान चालीसा नित्य पाठ
- 2मंगल ग्रह मंत्र: 'ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः' — 10,000 जप
- 3मंगल यंत्र स्थापना
- 4मंगलवार को हनुमान जी को सिंदूर, तेल अर्पण
- 5प्रवाल (मूंगा) रत्न धारण (ज्योतिष परामर्श से)
- 6नागबलि/नारायण नागबलि पूजा (त्रम्बकेश्वर — विशेष स्थान)
- 7राहु मंत्र: 'ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः'
- 8केतु मंत्र: 'ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः'
- 9नागपंचमी पर विशेष पूजा
- 10गोमेद + वैदूर्य रत्न (ज्योतिष अनुसार)
- 11शनि मंत्र: 'ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः' — 23,000 जप
- 12शनि यंत्र स्थापना
- 13हनुमान चालीसा (शनिवार विशेष)
- 14काले तिल दान, सरसों तेल दान शनिवार को
- 15नीलम रत्न (केवल ज्योतिष परामर्श से)
- 16पितृ तर्पण (अमावस्या पर)
- 17महालय श्राद्ध (पितृपक्ष में)
- 18विष्णु सहस्रनाम पाठ
- 19गया/प्रयाग में पिण्डदान
- 20'ॐ पितृभ्यो नमः' — नित्य जप
- 21दुर्गा सप्तशती पाठ
- 22सर्प सूक्त पाठ
- 23ज्योतिर्लिंग दर्शन
- 24कुंडली विश्लेषण योग्य ज्योतिषी से करवाएं
- 25तांत्रिक उपाय ज्योतिषीय/तांत्रिक विशेषज्ञ के निर्देश में ही करें
- 26अनावश्यक भय न करें — प्रत्येक कुंडली में कुछ न कुछ दोष होता है
- 27शास्त्रों में कर्म और पुरुषार्थ को सर्वोपरि माना गया है
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