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तंत्र साधना📜 शारदातिलक तंत्र, मन्त्र महार्णव, ज्योतिष शास्त्र (बृहत्पाराशर होरा), नवग्रह स्तोत्र, लाल किताब2 मिनट पठन

तंत्र में कुंडली दोष निवारण कैसे किया जाता है?

संक्षिप्त उत्तर

कुंडली दोष तांत्रिक निवारण: मंगल दोष — हनुमान चालीसा + मंगल मंत्र। काल सर्प — नागबलि + राहु-केतु मंत्र। शनि — शनि मंत्र 23,000 + हनुमान चालीसा। पितृ — तर्पण + श्राद्ध। सर्वदोष — नवग्रह यंत्र + रुद्राभिषेक। योग्य ज्योतिषी से परामर्श अनिवार्य।

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विस्तृत उत्तर

तंत्र शास्त्र में जन्म कुंडली के विभिन्न दोषों के निवारण के लिए विशिष्ट मंत्र, यंत्र, और साधना विधियाँ बताई गई हैं।

प्रमुख कुंडली दोष और तांत्रिक निवारण

1मंगल दोष (मांगलिक दोष)

  • हनुमान चालीसा नित्य पाठ
  • मंगल ग्रह मंत्र: 'ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः' — 10,000 जप
  • मंगल यंत्र स्थापना
  • मंगलवार को हनुमान जी को सिंदूर, तेल अर्पण
  • प्रवाल (मूंगा) रत्न धारण (ज्योतिष परामर्श से)

2काल सर्प दोष

  • नागबलि/नारायण नागबलि पूजा (त्रम्बकेश्वर — विशेष स्थान)
  • राहु मंत्र: 'ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः'
  • केतु मंत्र: 'ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः'
  • नागपंचमी पर विशेष पूजा
  • गोमेद + वैदूर्य रत्न (ज्योतिष अनुसार)

3शनि दोष (साढ़ेसाती/ढैय्या)

  • शनि मंत्र: 'ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः' — 23,000 जप
  • शनि यंत्र स्थापना
  • हनुमान चालीसा (शनिवार विशेष)
  • काले तिल दान, सरसों तेल दान शनिवार को
  • नीलम रत्न (केवल ज्योतिष परामर्श से)

4पितृ दोष

  • पितृ तर्पण (अमावस्या पर)
  • महालय श्राद्ध (पितृपक्ष में)
  • विष्णु सहस्रनाम पाठ
  • गया/प्रयाग में पिण्डदान
  • 'ॐ पितृभ्यो नमः' — नित्य जप

5राहु-केतु दोष

  • दुर्गा सप्तशती पाठ
  • सर्प सूक्त पाठ
  • ज्योतिर्लिंग दर्शन

सामान्य तांत्रिक निवारण विधि (सभी दोषों के लिए)

1. नवग्रह यंत्र: सर्वग्रह दोष शान्ति हेतु एकमात्र यंत्र।

2. नवग्रह स्तोत्र: 'जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महद्युतिम्...' — प्रतिदिन पाठ।

3. रुद्राभिषेक: शिवलिंग पर जलाभिषेक + रुद्र मंत्र — सर्वग्रह शान्तिकर।

4. दशांश हवन: किसी भी ग्रह मंत्र के जप संख्या का दशांश (10%) हवन — प्रभाव बहुगुणित।

सावधानी

  • कुंडली विश्लेषण योग्य ज्योतिषी से करवाएं
  • तांत्रिक उपाय ज्योतिषीय/तांत्रिक विशेषज्ञ के निर्देश में ही करें
  • अनावश्यक भय न करें — प्रत्येक कुंडली में कुछ न कुछ दोष होता है
  • शास्त्रों में कर्म और पुरुषार्थ को सर्वोपरि माना गया है
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शास्त्रीय स्रोत
शारदातिलक तंत्र, मन्त्र महार्णव, ज्योतिष शास्त्र (बृहत्पाराशर होरा), नवग्रह स्तोत्र, लाल किताब
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