तंत्र में लता साधना क्या होती है?
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लता साधना: 'लता' = शक्ति/स्त्री तत्व। कौल/वामाचार की गोपनीय साधना — शक्ति-सहचर में काम-ऊर्जा का ऊर्ध्वगमन। दो स्तर: प्रतीकात्मक (दक्षिणाचार) और यथार्थ (वामाचार)। केवल गुरु-दीक्षित वीराचार साधक ही अधिकारी। बिना गुरु = पतन। कलियुग में मानसिक रूप ही उचित।
- 1दक्षिणाचार में: लता साधना पूर्णतः प्रतीकात्मक है — मानसिक भाव से शक्ति का ध्यान
- 2वामाचार/कौलाचार में: यथार्थ स्तर पर — दीक्षित भैरवी के साथ विशिष्ट तांत्रिक क्रिया
- 3काम ऊर्जा का ऊर्ध्वगमन (कुंडलिनी जागरण)
- 4वासना पर विजय — वासना को साधना में रूपांतरित करना
- 5शिव-शक्ति ऐक्य का प्रत्यक्ष अनुभव
- 6इन्द्रिय-जय और आत्म-साक्षात्कार
- 7गुरु-दीक्षा अनिवार्य — बिना गुरु असम्भव
- 8वासना-रहित भाव — कामुकता = पतन
- 9दीक्षित भैरवी का होना अनिवार्य
- 10पूर्ण ब्रह्मचर्य का पूर्वाभ्यास
- 11गोपनीयता अनिवार्य
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तंत्र साधना
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