तंत्र में नवग्रह यंत्र कैसे प्रयोग करें?
की चेकलिस्ट
नवग्रह यंत्र प्रयोग: ताम्र/रजत पट्ट पर 9 ग्रहों के यंत्र। विधि: गंगाजल से शुद्धि → प्राण प्रतिष्ठा (शुक्ल पक्ष) → प्रत्येक ग्रह बीज मंत्र 108 बार → ईशान कोण में स्थापना। नित्य धूप-दीप। सावधानी: भूमि पर न रखें, अशुद्ध स्पर्श वर्जित।
- 1शुद्ध ताम्रपत्र (सर्वाधिक प्रचलित), रजत पत्र, या अष्टधातु से निर्मित यंत्र प्राप्त करें
- 2यंत्र किसी सिद्ध साधक या विश्वसनीय स्रोत से प्राप्त हो
- 3यंत्र को गंगाजल या पंचगव्य से धोएं
- 4कच्चे दूध से स्नान कराएं
- 5शुद्ध जल से अन्तिम स्नान
- 6शुभ मुहूर्त चुनें (रविवार/गुरुवार, शुक्ल पक्ष)
- 7प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें
- 8यंत्र को लाल/पीले वस्त्र पर रखें
- 9गणपति पूजन, गुरु स्मरण
- 10पंचोपचार या षोडशोपचार पूजा (गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य)
- 11नवग्रह मंत्रों से अभिषेक
- 12प्रत्येक ग्रह का बीज मंत्र 108 बार जपें:
- 13सूर्य: ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
- 14चन्द्र: ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः
- 15मंगल: ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः
- 16बुध: ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः
- 17गुरु: ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः
- 18शुक्र: ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः
- 19शनि: ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः
- 20राहु: ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः
- 21केतु: ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः
- 22पूजा स्थान या ईशान कोण में स्थापित करें
- 23लाल/पीले वस्त्र पर रखें
- 24प्रतिदिन धूप-दीप दिखाएं
- 25सप्ताह में कम से कम एक बार पूर्ण पूजा करें
- 26व्यापार स्थल में रखने से आर्थिक उन्नति
- 27गृह प्रवेश पर स्थापना से गृह शांति
- 28विशिष्ट ग्रह दोष होने पर उस ग्रह के मंत्र का अतिरिक्त जप
- 29यंत्र को कभी भूमि पर सीधा न रखें
- 30अशुद्ध हाथों से स्पर्श न करें
- 31यंत्र को दूसरों को दिखाने से बचें
- 32यदि यंत्र टूट जाए या क्षतिग्रस्त हो, तो उसे जल में विसर्जित कर नया यंत्र स्थापित करें
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