विस्तृत उत्तर
तंत्र शास्त्र में नवग्रह यंत्र सभी नौ ग्रहों की संयुक्त शक्ति का प्रतीक है। इसका उचित प्रयोग ग्रह दोषों के निवारण और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाने के लिए किया जाता है।
नवग्रह यंत्र का स्वरूप
एक ही ताम्र/रजत/स्वर्ण पट्ट पर नौ ग्रहों के अलग-अलग यंत्र अंकित होते हैं — प्रत्येक ग्रह का अपना बीज मंत्र और संख्या विन्यास।
प्रयोग विधि
चरण 1 — यंत्र प्राप्ति
- ▸शुद्ध ताम्रपत्र (सर्वाधिक प्रचलित), रजत पत्र, या अष्टधातु से निर्मित यंत्र प्राप्त करें
- ▸यंत्र किसी सिद्ध साधक या विश्वसनीय स्रोत से प्राप्त हो
चरण 2 — शुद्धिकरण
- ▸यंत्र को गंगाजल या पंचगव्य से धोएं
- ▸कच्चे दूध से स्नान कराएं
- ▸शुद्ध जल से अन्तिम स्नान
चरण 3 — प्राण प्रतिष्ठा (सबसे महत्वपूर्ण)
- ▸शुभ मुहूर्त चुनें (रविवार/गुरुवार, शुक्ल पक्ष)
- ▸प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें
- ▸यंत्र को लाल/पीले वस्त्र पर रखें
- ▸गणपति पूजन, गुरु स्मरण
- ▸पंचोपचार या षोडशोपचार पूजा (गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य)
- ▸नवग्रह मंत्रों से अभिषेक
- ▸प्रत्येक ग्रह का बीज मंत्र 108 बार जपें:
- ▸सूर्य: ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
- ▸चन्द्र: ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः
- ▸मंगल: ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः
- ▸बुध: ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः
- ▸गुरु: ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः
- ▸शुक्र: ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः
- ▸शनि: ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः
- ▸राहु: ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः
- ▸केतु: ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः
चरण 4 — स्थापना
- ▸पूजा स्थान या ईशान कोण में स्थापित करें
- ▸लाल/पीले वस्त्र पर रखें
- ▸प्रतिदिन धूप-दीप दिखाएं
- ▸सप्ताह में कम से कम एक बार पूर्ण पूजा करें
विशेष प्रयोग
- ▸व्यापार स्थल में रखने से आर्थिक उन्नति
- ▸गृह प्रवेश पर स्थापना से गृह शांति
- ▸विशिष्ट ग्रह दोष होने पर उस ग्रह के मंत्र का अतिरिक्त जप
सावधानियाँ
- ▸यंत्र को कभी भूमि पर सीधा न रखें
- ▸अशुद्ध हाथों से स्पर्श न करें
- ▸यंत्र को दूसरों को दिखाने से बचें
- ▸यदि यंत्र टूट जाए या क्षतिग्रस्त हो, तो उसे जल में विसर्जित कर नया यंत्र स्थापित करें