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तंत्र साधना के दौरान ऊर्जा का अनुभव कैसे होता है?

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तंत्रालोक: तांत्रिक शक्ति नित्य साधक में व्याप्त — साधना से तत्काल प्रकट। विशिष्ट अनुभव: स्पंद (लयबद्ध कंपन), मूलाधार में उष्णता (कुण्डलिनी), आज्ञा में प्रकाश-ज्योति, देवता की 'उपस्थिति-भार', रोमांच-अश्रु, श्वास का स्वतः रुकना। तंत्र में तीव्रता अधिक — गुरु-मार्गदर्शन अनिवार्य।

  1. 1बीज मंत्र — तांत्रिक बीज मंत्र (क्रीं, हूं, ह्रीं) की आवृत्ति-शक्ति सामान्य मंत्रों से कई गुना अधिक
  2. 2यंत्र का संयोग — यंत्र + मंत्र + देवता = ऊर्जा का त्रिकोण
  3. 3रात्रि-साधना — तंत्र में रात्रि-काल शक्तिपात के लिए अनुकूल
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तंत्र साधना

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