का सरल उत्तर
तंत्रालोक: तांत्रिक शक्ति नित्य साधक में व्याप्त — साधना से तत्काल प्रकट। विशिष्ट अनुभव: स्पंद (लयबद्ध कंपन), मूलाधार में उष्णता (कुण्डलिनी), आज्ञा में प्रकाश-ज्योति, देवता की 'उपस्थिति-भार', रोमांच-अश्रु, श्वास का स्वतः रुकना। तंत्र में तीव्रता अधिक — गुरु-मार्गदर्शन अनिवार्य।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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