तंत्र साधना के दौरान सिद्धि कैसे प्राप्त होती है?
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महानिर्वाण: सिद्धि = साधना + मंत्र-शक्ति + साधक-पात्रता + गुरु-कृपा — चारों का संयोग। प्रकार: मंत्र-सिद्धि (आधार), अष्टसिद्धि (अणिमा-महिमा आदि), वाक्-सिद्धि, त्रिकाल-दर्शन। पाँच चरण: दीक्षा → पुरश्चरण → नियम → ध्यान-जप → गुरु-कृपा। सिद्धि का दुरुपयोग = नाश।
- 1दीक्षा — योग्य गुरु से
- 2पुरश्चरण — शास्त्र-निर्धारित जप-संख्या पूर्ण
- 3नियम-पालन — ब्रह्मचर्य, एकाहार, गोपनीयता
- 4ध्यान-सहित जप — भाव > संख्या
- 5गुरु-कृपा — यही सिद्धि का अंतिम द्वार
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तंत्र साधना
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