तंत्र साधना के नियम क्या हैं?
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तंत्र साधना के नियम (कुलार्णव तंत्र): गुरु दीक्षा, गोपनीयता, नित्यता, शुद्धि, संकल्प पूर्ति, अहिंसा और भक्ति। दस दोष वर्जित जिनमें प्रमुख हैं — अश्रद्धा, गुरु द्रोह, दुष्ट कामना और साधना का प्रदर्शन। निश्चित समय, स्थान और माला से साधना करें।
- 1गुरु की प्राथमिकता: गुरु के निर्देश सर्वोपरि
- 2दीक्षा: बिना दीक्षा कोई तांत्रिक अनुष्ठान नहीं
- 3गोपनीयता: साधना को सार्वजनिक न करें
- 4नित्यता: साधना नियमित रूप से करें
- 5शुद्धि: बाह्य (स्नान) और आंतरिक (मन) शुद्धि
- 6संकल्प पूर्ति: जो संकल्प लिया, पूरा करें
- 7अहिंसा: दूसरों को हानि पहुँचाने की साधना न करें
- 8सत्य: मंत्र-दीक्षा की सच्चाई बनाए रखें
- 9विनम्रता: सिद्धि पर अहंकार न करें
- 10भक्ति: श्रद्धा ही साधना की नींव है
- 11अश्रद्धा — बिना श्रद्धा जप
- 12अनाचार — अशुद्ध जीवन
- 13गुरु द्रोह
- 14शास्त्र का अपमान
- 15साधना का प्रदर्शन
- 16दुष्ट कामना
- 17संकल्प भंग
- 18मंत्र विक्रय
- 19चंचल मन
- 20भोजन के बाद तुरंत जप
- 21शौच — बाह्य शुद्धता
- 22संतोष — आंतरिक तृप्ति
- 23तपस — अनुशासन
- 24स्वाध्याय — शास्त्र पठन
- 25ईश्वर प्रणिधान — देव समर्पण
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