विस्तृत उत्तर
तंत्र साधना के नियम कुलार्णव तंत्र और महानिर्वाण तंत्र में विस्तार से वर्णित हैं:
कुलार्णव तंत्र के दस प्रमुख नियम
- 1गुरु की प्राथमिकता: गुरु के निर्देश सर्वोपरि
- 2दीक्षा: बिना दीक्षा कोई तांत्रिक अनुष्ठान नहीं
- 3गोपनीयता: साधना को सार्वजनिक न करें
- 4नित्यता: साधना नियमित रूप से करें
- 5शुद्धि: बाह्य (स्नान) और आंतरिक (मन) शुद्धि
- 6संकल्प पूर्ति: जो संकल्प लिया, पूरा करें
- 7अहिंसा: दूसरों को हानि पहुँचाने की साधना न करें
- 8सत्य: मंत्र-दीक्षा की सच्चाई बनाए रखें
- 9विनम्रता: सिद्धि पर अहंकार न करें
- 10भक्ति: श्रद्धा ही साधना की नींव है
कुलार्णव तंत्र के साधना के दस दोष (वर्जित)
- 1अश्रद्धा — बिना श्रद्धा जप
- 2अनाचार — अशुद्ध जीवन
- 3गुरु द्रोह
- 4शास्त्र का अपमान
- 5साधना का प्रदर्शन
- 6दुष्ट कामना
- 7संकल्प भंग
- 8मंत्र विक्रय
- 9चंचल मन
- 10भोजन के बाद तुरंत जप
महानिर्वाण तंत्र के पाँच नियम
- 1शौच — बाह्य शुद्धता
- 2संतोष — आंतरिक तृप्ति
- 3तपस — अनुशासन
- 4स्वाध्याय — शास्त्र पठन
- 5ईश्वर प्रणिधान — देव समर्पण
दैनिक अनुशासन
- ▸निश्चित समय पर साधना
- ▸निश्चित स्थान पर
- ▸निश्चित माला से
- ▸संकल्प लेकर — बिना संकल्प के तांत्रिक जप निष्फल