विस्तृत उत्तर
तंत्र साधना के नियम कुलार्णव तंत्र और महानिर्वाण तंत्र में विस्तार से वर्णित हैं। इनका पालन अनिवार्य है:
प्रथम और सर्वोच्च नियम — गुरु दीक्षा
कुलार्णव तंत्र: 'गुरुं विना न सिद्धिः' — बिना गुरु दीक्षा के तंत्र साधना आरंभ न करें।
साधक की पात्रता (अधिकार)
- 1चतुष्टय संपत्ति (चार योग्यताएं):
- ▸विवेक — सत्य-असत्य का भेद
- ▸वैराग्य — सांसारिक विषयों से विरक्ति
- ▸षट्संपत्ति — शम, दम, उपरति, तितिक्षा, श्रद्धा, समाधान
- ▸मुमुक्षुत्व — मोक्ष की इच्छा
- 1शारीरिक शुद्धि:
- ▸नित्य स्नान — साधना से पूर्व अनिवार्य
- ▸सात्विक आहार — लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा वर्जित (दक्षिणाचार में)
- ▸ब्रह्मचर्य — साधना काल में
- 1मानसिक शुद्धि:
- ▸क्रोध, लोभ, ईर्ष्या, अहंकार का त्याग
- ▸सत्य वचन — झूठ तंत्र शक्ति नष्ट करता है
- ▸दूसरों को हानि न पहुँचाने का संकल्प
साधना के नियम
- 1एकांत और गोपनीयता:
साधना एकांत में करें। साधना की बात किसी अनाधिकारी को न बताएं।
- 1नित्यता:
एक बार साधना आरंभ करें तो नित्य करें। अनियमितता साधना को निष्फल बनाती है।
- 1समय:
नित्य एक ही समय पर जप/पूजा करें। शरीर और मन को नियमित लय की आदत होती है।
- 1स्थान:
एक ही स्थान पर साधना करें — वह स्थान शक्ति संग्रहीत करता है।
- 1आसन और दिशा:
उचित आसन पर, उचित दिशा में। देवी साधना — उत्तर/पूर्व; काली — दक्षिण।
- 1श्रद्धा:
श्रद्धावान् लभते ज्ञानम्' — श्रद्धा के बिना तंत्र केवल यांत्रिक क्रिया है।
कुलार्णव तंत्र के दस दोष जो साधना नष्ट करते हैं
- 1अश्रद्धा
- 2गुरु-निंदा
- 3देवता की अवज्ञा
- 4मंत्र का अशुद्ध उच्चारण
- 5साधना का प्रदर्शन
- 6संकल्प में कमजोरी
- 7अनुचित भोजन
- 8असंयमित जीवन
- 9साधना की अनियमितता
- 10फल का अत्यधिक लोभ


