विस्तृत उत्तर
काली साधना के नियम तंत्र शास्त्र और कालिका पुराण में विस्तार से वर्णित हैं। इनका पालन अनिवार्य है:
शरीर और मन की शुद्धि
- 1स्नान: साधना से पूर्व स्नान अनिवार्य है — विशेषकर रात्रि साधना से पूर्व
- 2ब्रह्मचर्य: साधना काल में ब्रह्मचर्य का पालन करें
- 3मन की शुद्धि: क्रोध, ईर्ष्या, अहंकार और भय का त्याग करें
- 4भय मुक्ति: काली साधना में सर्वाधिक महत्वपूर्ण — बिना भय के साधना करें
आचरण नियम
- 1गुरु दीक्षा: उच्च काली साधना से पूर्व सिद्ध गुरु से दीक्षा लें
- 2एकांत: साधना के समय किसी को बाधा न आने दें
- 3गोपनीयता: साधना की बात किसी अनाधिकारी व्यक्ति को न बताएं
- 4निरंतरता: एक बार साधना आरंभ करें तो नियमित रखें — बीच में न छोड़ें
- 5श्रद्धा: पूर्ण श्रद्धा और समर्पण भाव रखें — संदेह साधना भंग करता है
आहार नियम
- 1तांत्रिक परंपरा में 'पंचमकार' (मद्य, मांस, मत्स्य, मुद्रा, मैथुन) का उल्लेख है — किंतु यह केवल उच्च दीक्षित तांत्रिकों के लिए है और अत्यंत कड़े नियमों के अंतर्गत है
- 2सात्विक साधक के लिए: शुद्ध सात्विक आहार, लहसुन-प्याज का त्याग
- 3साधना दिवस: उस दिन मांसाहार से बचें
स्थान नियम
- 1शमशान (श्मशान) साधना — केवल सिद्ध तांत्रिकों के लिए; सामान्य जन न करें
- 2घर की साधना: पूजा कक्ष, शांत और एकांत स्थान
- 3काली मंदिर में साधना: अत्यंत शुभ और सुरक्षित
दिशा नियम
- ▸दक्षिण मुख करके बैठें (काली की दिशा)
- ▸या उत्तर मुख (कुछ परंपराओं में)
मनोवैज्ञानिक नियम
- 1माँ का भाव रखें — काली भयंकर नहीं, माँ हैं
- 2साधना में 'माँ-बच्चे' का संबंध रखें
- 3'काली मुझे दंड देंगी' — यह भाव न रखें
- 4अष्टसिद्धि, बाधा, भूत-प्रेत भय न रखें




