तंत्र ग्रंथकुलार्णव तंत्र में क्या शिक्षा दी गई है?कौल मार्ग। गुरु = सर्वस्व ('न गुरोरधिकं तत्त्वं')। पाशु→वीर→दिव्य। बाहरी < आंतरिक। पंचमकार = प्रतीकात्मक। गृहस्थ = साधना। कुल = शक्ति।#कुलार्णव#तंत्र#शिक्षा
तंत्र साधनातंत्र में कुलाचार पद्धति क्या होती है?कुलाचार: कुल = शक्ति, आचार = पद्धति। 7 आचारों में सर्वोच्च — दक्षिण+वाम का समन्वय। विशेषताएँ: भोग-मोक्ष समन्वय, गुरु-कुल परम्परा, गोपनीयता, 'देह = मंदिर'। पंचमकार भाव-अनुसार (प्रतीकात्मक/यथार्थ)। केवल उन्नत साधक अधिकारी। दुरुपयोग वर्जित।#कुलाचार#कौलाचार
तंत्र नियमतंत्र साधना के नियम क्या हैं?तंत्र साधना के नियम (कुलार्णव तंत्र): गुरु दीक्षा, गोपनीयता, नित्यता, शुद्धि, संकल्प पूर्ति, अहिंसा और भक्ति। दस दोष वर्जित जिनमें प्रमुख हैं — अश्रद्धा, गुरु द्रोह, दुष्ट कामना और साधना का प्रदर्शन। निश्चित समय, स्थान और माला से साधना करें।#तंत्र नियम#कुलार्णव#दस दोष