तंत्र शास्त्र में दीक्षा कितने प्रकार की होती है?
की चेकलिस्ट
प्रमुख: (1) क्रिया (बाह्य — होम/अभिषेक)। (2) चाक्षुषी (दृष्टि)। (3) स्पर्श (हाथ/मस्तक)। (4) शब्द/मंत्र (कान में — सर्वाधिक प्रचलित)। (5) ध्यान/मानसिक (सर्वसूक्ष्म)। (6) शक्तिपात (शक्ति प्रेषण — सर्वशक्तिमान)। (7) स्वप्न (दुर्लभ)। तंत्रसार: 'ज्ञान दे, पाप क्षीण करे = दीक्षा।'
- 1होम, अभिषेक, पूजा आदि बाह्य क्रियाओं द्वारा।
- 2पृथ्वी और जल तत्व आधारित।
- 3सबसे स्थूल प्रकार।
- 4चाक्षुषी दीक्षा: गुरु की दृष्टि (नेत्र) मात्र से — तेज तत्व। शंकराचार्य ने हस्तामलक को दृष्टि से दीक्षित किया।
- 5स्पर्श दीक्षा: गुरु के स्पर्श (हाथ/मस्तक) से — वायु तत्व। रामकृष्ण परमहंस ने विवेकानंद को स्पर्श से।
- 6शब्द/मंत्र दीक्षा: गुरु कान में मंत्र कहें — आकाश तत्व। सबसे प्रचलित।
- 7ध्यान/मानसिक दीक्षा: गुरु मन से शक्ति प्रेषित — सर्वसूक्ष्म, सर्वश्रेष्ठ।
- 8गुरु अपनी शक्ति (कुण्डलिनी) शिष्य में प्रेषित।
- 9सबसे शक्तिशाली — तत्काल कुण्डलिनी जागरण संभव।
- 10दूर से भी संभव (संकल्प शक्ति)।
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