तुलसी विवाह कब और कैसे करें?
की चेकलिस्ट
तुलसी विवाह: कार्तिक शुक्ल द्वादशी (देवउठनी एकादशी भी)। विधि: तुलसी-शालिग्राम स्नान-श्रृंगार → मण्डप → कन्यादान → सात फेरे → 'ॐ तुलस्यै नमः' जाप → आरती-भोग → दान। विवाह मुहूर्तों की शुरुआत। कन्यादान तुल्य पुण्य।
- 1तैयारी: तुलसी के पौधे को गंगाजल से स्नान कराएँ। हल्दी, केसर, चन्दन से सजाएँ। तुलसी को चुनरी ओढ़ाएँ और 16 श्रृंगार की सामग्री (चूड़ी, बिछुए, सिंदूर, बिंदी, मेहंदी आदि) अर्पित करें।
- 2शालिग्राम सज्जा: शालिग्राम शिला को गंगाजल से स्नान कराकर तुलसी पत्तों और फूलों से सजाएँ। पीले-लाल वस्त्र पहनाएँ।
- 3मण्डप: तुलसी के पौधे के चारों ओर गन्ने या फूलों से छोटा मण्डप सजाएँ। रंगोली बनाएँ। आम-केले के पत्ते लगाएँ।
- 4कलश स्थापना: चौकी पर तुलसी और शालिग्राम स्थापित करें। बगल में जल भरा कलश रखें।
- 5विवाह विधि: सामान्य हिन्दू विवाह की तरह रस्में निभाएँ — कन्यादान (तुलसी माता का), मंत्रोच्चार, सात फेरे (शालिग्राम को गमले के चारों ओर घुमाकर), मौली बंधन।
- 6मंत्र: 'ॐ तुलस्यै नमः' और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जाप।
- 7आरती और भोग: विवाह संपन्न होने पर आरती करें। मिठाई, फल, पान का भोग लगाएँ।
- 8दान: विवाह के बाद दान अवश्य करें।
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