उपनिषद क्या हैं?
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उपनिषद वेदों का दार्शनिक भाग है — गुरु के निकट बैठकर प्राप्त रहस्य ज्ञान। 108 उपनिषद हैं, 10 प्रमुख हैं। चार महावाक्य: 'प्रज्ञानं ब्रह्म', 'अहं ब्रह्मास्मि', 'तत्त्वमसि', 'अयमात्मा ब्रह्म'। सार: आत्मा और परमात्मा एक हैं — यही वेदांत का केंद्रीय सत्य है।
- 1'प्रज्ञानं ब्रह्म' (ऐतरेय — ऋग्वेद) — चेतना ही ब्रह्म है
- 2'अहं ब्रह्मास्मि' (बृहदारण्यक — यजुर्वेद) — मैं ब्रह्म हूँ
- 3'तत्त्वमसि' (छांदोग्य — सामवेद) — वह तुम हो
- 4'अयमात्मा ब्रह्म' (माण्डूक्य — अथर्ववेद) — यह आत्मा ब्रह्म है
- 5ब्रह्म — परम सत्ता जो सर्वव्यापी और चेतन है
- 6आत्मा — व्यक्तिगत चेतना
- 7अद्वैत — ब्रह्म और आत्मा एक ही हैं (शंकराचार्य)
- 8माया — सांसारिक प्रतीति जो ब्रह्म को ढकती है
- 9मोक्ष — आत्मा का ब्रह्म में विलय
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