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वर्णाश्रम धर्म क्या है आज कितना प्रासंगिक

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वर्णाश्रम = 4 वर्ण (गुण-कर्म आधारित) + 4 आश्रम (ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ, संन्यास)। मूल उद्देश्य: संतुलित जीवन। प्रासंगिक: जीवन चरणों का क्रमिक विकास, श्रम विभाजन। अप्रासंगिक: जन्म आधारित जाति, स्त्री प्रतिबंध। गीता: 'गुणकर्मविभागशः' — गुण-कर्म से, जन्म से नहीं।

  1. 1ब्रह्मचर्य आश्रम (0-25 वर्ष) — विद्या अर्जन, गुरुकुल, शारीरिक-मानसिक विकास, इंद्रिय संयम।
  2. 2गृहस्थ आश्रम (25-50 वर्ष) — विवाह, परिवार, जीविका, सामाजिक दायित्व, अर्थ-काम पुरुषार्थ। सबसे महत्वपूर्ण — अन्य तीन आश्रमों का पालनकर्ता।
  3. 3वानप्रस्थ आश्रम (50-75 वर्ष) — गृहस्थ से क्रमशः विरक्ति, आध्यात्मिक साधना, समाज सेवा, अनुभव साझा करना।
  4. 4संन्यास आश्रम (75+ वर्ष) — पूर्ण संसार त्याग, मोक्ष साधना, आत्मज्ञान।
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