विष या दुर्घटना से मरे का श्राद्ध कब?
की चेकलिस्ट
विष या दुर्घटना से मरे व्यक्ति का श्राद्ध 'चतुर्दशी' को होता है। यह अकाल मृत्यु की कोटि में आता है। इसे 'घट चतुर्दशी' या 'घायल चतुर्दशी' कहते हैं। मृत्यु किसी भी तिथि को हुई हो — श्राद्ध केवल चतुर्दशी को। यह कठोर और अलङ्घ्य नियम है।
- 1विष से मृत्यु = अकाल मृत्यु।
- 2दुर्घटना से मृत्यु = अकाल मृत्यु।
- 3दोनों चतुर्दशी श्राद्ध की कोटि में।
- 4पितृ पक्ष की चतुर्दशी।
- 5आश्विन कृष्ण चतुर्दशी।
- 6ज़हर खाकर मरे।
- 7ज़हर देकर मारे गए।
- 8सर्पदंश आदि से मरे।
- 9सभी प्रकार के विष-जनित मृत्यु।
- 10सड़क दुर्घटना।
- 11अग्नि दुर्घटना।
- 12जल में डूबकर मृत्यु।
- 13ऊंचाई से गिरकर मृत्यु।
- 14सभी प्रकार की आकस्मिक दुर्घटनाएँ।
- 15'केवल' शब्द शास्त्रों में स्पष्ट।
- 16कोई अन्य तिथि उपयुक्त नहीं।
- 17विष/दुर्घटना से मृत्यु किसी भी तिथि को हुई हो।
- 18श्राद्ध केवल चतुर्दशी को।
- 19कोई अपवाद नहीं।
- 20कठोरता से पालन।
- 21गलत तिथि पर श्राद्ध करने से लाभ नहीं — हानि हो सकती है।
- 22इसलिए तिथि का सही चयन अत्यंत आवश्यक।
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विशेष मृत्यु श्राद्ध
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