व्याहृति आहुति क्या है?
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व्याहृति = ब्रह्मांड का विस्तार। भूः-भुवः-स्वः = त्रिलोक के प्रतीक। 4 आहुतियाँ: 1. भूः = पृथ्वी-प्राण वायु, 2. भुवः = अंतरिक्ष-अपान वायु, 3. स्वः = द्युलोक-व्यान वायु, 4. भूर्भुवः स्वः = समस्त लोकों की समेकित आहुति।
- 1'ॐ भूरग्नये प्राणाय स्वाहा। इदमग्नये प्राणाय - इदन्न मम॥' (पृथ्वी लोक एवं प्राण वायु के निमित्त)
- 2'ॐ भुवर्वायवेऽपानाय स्वाहा। इदं वायवेऽपानाय - इदन्न मम॥' (अंतरिक्ष लोक एवं अपान वायु के निमित्त)
- 3'ॐ स्वरादित्याय व्यानाय स्वाहा। इदमादित्याय व्यानाय - इदन्न मम॥' (द्युलोक एवं व्यान वायु के निमित्त)
- 4'ॐ भूर्भुवः स्वरग्निवाय्वादित्येभ्यः प्राणापानव्यानेभ्यः स्वाहा। इदमग्निवाय्वादित्येभ्यः प्राणापानव्यानेभ्यः - इदन्न मम॥' (समस्त लोकों और वायु के निमित्त समेकित आहुति)
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