यदा यदा हि धर्मस्य श्लोक का अर्थ क्या है
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गीता 4.7-8 — जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब भगवान प्रकट होते हैं — सज्जनों की रक्षा, दुष्टों के विनाश और धर्म स्थापना के लिए — प्रत्येक युग में। यह अवतारवाद का मूल सिद्धांत और शाश्वत आश्वासन है।
- 1अवतार सिद्धांत — यह हिंदू धर्म के अवतारवाद का मूल श्लोक है। भगवान आवश्यकता अनुसार अवतार लेते हैं।
- 2तीन उद्देश्य:
- 3'युगे युगे' — यह प्रक्रिया एकबारगी नहीं, शाश्वत है। जब-जब आवश्यकता होगी, भगवान प्रकट होंगे।
- 4दशावतार — मत्स्य, कूर्म, वराह, नरसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध (कुछ परंपराओं में), कल्कि — ये इसी सिद्धांत के उदाहरण हैं।
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