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यज्ञ में यजुर्वेद के मंत्रों का प्रयोग कैसे होता है

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यजुर्वेद = कर्मकाण्ड का वेद, अध्वर्यु (यज्ञ कर्ता) का। प्रयोग: अग्नि प्रज्वलन, आहुति ('ॐ अग्नये स्वाहा'), संस्कार मंत्र (विवाह, अन्त्येष्टि)। प्रसिद्ध: गायत्री (36.3), महामृत्युंजय (3.60), पुरुष सूक्त। गद्यात्मक शैली — क्रिया के स्पष्ट निर्देश। आज भी संस्कारों में सर्वाधिक प्रयुक्त।

  1. 1'ॐ अग्नये स्वाहा, इदमग्नये इदं न मम।'
  2. 2'ॐ सोमाय स्वाहा'
  3. 3'ॐ प्रजापतये स्वाहा'
  4. 4विवाह: सप्तपदी, लाजाहोम, पाणिग्रहण मंत्र
  5. 5अन्त्येष्टि: दाह संस्कार मंत्र
  6. 6गायत्री मंत्र (36.3) — शुक्ल यजुर्वेद में भी
  7. 7महामृत्युंजय मंत्र (3.60)
  8. 8पुरुष सूक्त (31वाँ अध्याय)
  9. 9शिवसंकल्प सूक्त (34.1-6)
  10. 10कृष्ण यजुर्वेद (दक्षिण भारत — तैत्तिरीय संहिता): मंत्र और ब्राह्मण मिश्रित।
  11. 11शुक्ल यजुर्वेद (उत्तर भारत — वाजसनेयी संहिता): केवल शुद्ध मंत्र।
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