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यति का श्राद्ध कब होता है?

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यति (संन्यासी) का श्राद्ध — जिन्होंने संन्यास ग्रहण कर लिया था और सांसारिक बंधनों से मुक्त थे — पितृ पक्ष की 'द्वादशी' तिथि को होता है। यति और संन्यासी समानार्थी। यह उनकी विशिष्ट आध्यात्मिक कोटि के लिए शास्त्र-निर्धारित तिथि है।

  1. 1यति = संन्यासी।
  2. 2यति = वह व्यक्ति जिसने इंद्रियों पर संयम पाया हो।
  3. 3सांसारिक बंधनों से मुक्त महापुरुष।
  4. 4दोनों समानार्थी।
  5. 5शास्त्रों में दोनों एक ही अर्थ में प्रयुक्त।
  6. 6दोनों के लिए तिथि = द्वादशी।
  7. 7पितृ पक्ष की द्वादशी।
  8. 8आश्विन कृष्ण द्वादशी।
  9. 9गृहस्थ जीवन त्यागकर संन्यास लिया।
  10. 10मोह-माया, आसक्ति से दूर।
  11. 11आध्यात्मिक साधना में लीन।
  12. 12'महापुरुष' शब्द शास्त्रों में प्रयुक्त।
  13. 13अर्थात् सम्माननीय, श्रेष्ठ व्यक्तित्व।
  14. 14यति = सामान्य गृहस्थ नहीं।
  15. 15आध्यात्मिक रूप से उच्च।
  16. 16सामान्य पितरों जैसी मृत्यु तिथि के अनुसार नहीं।
  17. 17विशेष तिथि = द्वादशी।
  18. 18स्वाभाविक मृत्यु प्रतिपदा को → प्रतिपदा
  19. 19अकाल मृत्यु → चतुर्दशी
  20. 20सुहागिन स्त्री → नवमी
  21. 21संन्यासी / यति → द्वादशी ← यहाँ
  22. 22बच्चे → पंचमी / त्रयोदशी
  23. 23अज्ञात तिथि → सर्वपितृ अमावस्या
  24. 24यति = सांसारिक बंधनों से मुक्त।
  25. 25उनकी आत्मा पहले से ही उच्च आध्यात्मिक स्तर पर।
  26. 26द्वादशी = उनके लिए विशेष पवित्र तिथि।
  27. 27यति की मृत्यु किसी भी तिथि को हुई हो — श्राद्ध केवल द्वादशी।
  28. 28यह तिथि सामान्य गृहस्थ पितरों के लिए नहीं।
  29. 29केवल यतियों / संन्यासियों के लिए।
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