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अपराह्न काल से जुड़े सभी प्रश्न(6)

अपराह्न काल पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 6 प्रश्न उपलब्ध हैं।

लोक

अपराह्न काल में नवमी श्राद्ध क्यों करें?

यह पितृ कर्म का मुख्य काल है।

#अपराह्न काल#नवमी श्राद्ध#ब्राह्मण भोज
लोक

अपराह्न काल क्यों जरूरी है?

अपराह्न पितरों का अपना समय माना गया है।

#अपराह्न काल#पितृ काल#श्राद्ध
लोक

अपराह्न काल क्यों जरूरी है?

अपराह्न काल पितरों के विचरण का मुख्य समय माना गया है।

#अपराह्न काल#श्राद्ध समय#पितृ विचरण
लोक

तृतीया श्राद्ध किस समय करें?

तृतीया श्राद्ध कुतुप, रौहिण या अपराह्न काल में करें।

#श्राद्ध समय#कुतुप मुहूर्त#अपराह्न काल
श्राद्ध विधि

द्वितीया श्राद्ध कितने बजे करें?

द्वितीया श्राद्ध दिन के अपराह्न काल में करना चाहिए। सबसे श्रेष्ठ समय है कुतप मुहूर्त 11:36 AM से 12:24 PM तक। फिर रौहिण मुहूर्त 12:24 PM से 01:12 PM तक, और अपराह्न काल 01:12 PM से 03:39 PM तक। ये समय स्थानीय सूर्यास्त के अनुसार परिवर्तित हो सकते हैं। प्रातःकाल और रात्रिकाल में श्राद्ध सर्वथा वर्जित है।

#कुतप मुहूर्त#रौहिण मुहूर्त#अपराह्न काल
श्राद्ध मुहूर्त

अपराह्न काल का समय क्या है?

अपराह्न काल अपराह्न 01:34 से अपराह्न 04:04 तक का विशेष समय है, जो लगभग 2 घंटे 30 मिनट का होता है। यदि पूर्व मुहूर्तों में कार्य पूर्ण न हो, तो इस काल तक ब्राह्मण भोजन और विसर्जन संपन्न कर लेना चाहिए। यह तीन मुहूर्तों में सबसे लंबा और अंतिम है।

#अपराह्न काल#श्राद्ध समय#ब्राह्मण भोजन
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