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मंत्र विधि

संध्या काल में मंत्र जप करने का क्या महत्व है?

संध्या = दो ऊर्जाओं का मिलन — मंत्र शक्ति अधिक। 'संध्याहीनोऽशुचिः' — संध्या बिना अशुद्ध। प्रातः (ब्रह्म मुहूर्त) = सर्वोत्तम। मध्याह्न = मध्यम। सायं = द्वितीय। कम से कम प्रातः संध्या = अनिवार्य। गायत्री = सूर्य मंत्र = संध्या हेतु।

#संध्या#समय#त्रिसंध्या
जप समय

मंत्र जप का सही समय क्या है?

मंत्र जप का सर्वोत्तम समय ब्रह्ममुहूर्त (प्रातः 4-5:36 बजे) है — जप का फल 1000 गुना अधिक। प्रातः संध्या और सायंकाल संध्या भी शुभ हैं। प्रत्येक वार का अपना विशेष देवता है। नित्य एक ही समय जप करें — यह नियमितता जप की शक्ति बढ़ाती है।

#जप समय#ब्रह्ममुहूर्त#संध्या
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