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जीवन एवं मृत्यु

केवल मनुष्य को ही कर्मफल क्यों भोगना पड़ता है?

मनुष्य 'कर्म योनि' में है — उसे विवेक और स्वतंत्र इच्छा से नए कर्म करने की शक्ति मिली है। इसीलिए वह अपने कर्मों का पूरा उत्तरदायी है और उसे उनका फल भोगना पड़ता है।

#कर्मफल#मनुष्य योनि#विवेक
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