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निर्गुण सगुण से जुड़े सभी प्रश्न(2)

निर्गुण सगुण पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 2 प्रश्न उपलब्ध हैं।

रामचरितमानस — बालकाण्ड

'अगुन सगुन दुइ ब्रह्म सरूपा' — इसका क्या अर्थ है?

अर्थ — निर्गुण (निराकार) और सगुण (साकार) दोनों ब्रह्म के ही स्वरूप हैं। दोनों अकथनीय, अगाध, अनादि और अनुपम हैं। तुलसीदासजी ने दोनों को एक ही ब्रह्म के दो पहलू बताकर निर्गुण-सगुण विवाद का समाधान किया।

#बालकाण्ड#निर्गुण सगुण#ब्रह्म
रामचरितमानस — बालकाण्ड

तुलसीदासजी ने राम नाम को निर्गुण और सगुण दोनों से कैसे बड़ा बताया?

तुलसीदासजी ने कहा कि राम नाम निर्गुण और सगुण दोनों के बीच 'सुन्दर साक्षी' और 'चतुर दुभाषिया' है — दोनों का ज्ञान कराने वाला। रूप नाम के अधीन है, नाम के बिना रूप का ज्ञान नहीं हो सकता।

#बालकाण्ड#नाम महिमा#निर्गुण सगुण
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