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गीता ज्ञान

गीता श्लोक 9.22 — अनन्याश्चिन्तयन्तो मां — अर्थ क्या?

गीता 9.22: 'जो अनन्य भाव से मेरा निरंतर चिंतन करते हैं, उनका योगक्षेम मैं स्वयं वहन करता हूँ।' योग = अप्राप्त की प्राप्ति, क्षेम = प्राप्त की रक्षा। 'वहामि अहम्' = मैं स्वयं करता हूँ। शर्त: अनन्य भक्ति।

#गीता 9.22#अनन्य भक्ति#योगक्षेम
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