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शहद से जुड़े सभी प्रश्न(6)

शहद पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 6 प्रश्न उपलब्ध हैं।

लोक

स्वर्लोक में चार दिव्य झीलें कौन सी हैं?

स्वर्लोक में चार दिव्य झीलें हैं जिनमें शुद्ध जल, दूध, शहद और गन्ने का रस भरा है। इनके सेवन से अष्ट-सिद्धियाँ और योग शक्तियाँ स्वतः प्राप्त होती हैं।

#स्वर्लोक#चार झीलें#दूध
शिव पूजा विधि

शिवलिंग पर पंचामृत अभिषेक का सही क्रम क्या होना चाहिए?

पंचामृत अभिषेक क्रम: 1. गंगाजल/शुद्ध जल → 2. कच्चा दूध → 3. दही → 4. घी → 5. शहद → 6. शक्कर/मिश्री → 7. मिश्रित पंचामृत → 8. अंतिम शुद्ध जल स्नान। प्रत्येक द्रव्य के बाद शुद्ध जल से धोएं। अनुपात: दूध>दही>शक्कर>शहद>घी। शिवलिंग का चढ़ावा ग्रहण न करें।

#पंचामृत#अभिषेक#क्रम
शिव पूजा विधि

शिवलिंग पर शहद चढ़ाने की विधि और उसका फल क्या है?

शहद पंचामृत अभिषेक का प्रमुख अंग। विधि: पहले जल से स्नान → शहद की धारा → 'ॐ नमः शिवाय' जप → पुनः जल अभिषेक। फल: दरिद्रता नाश, रोग निवारण, वाणी में मधुरता, ग्रह दोष शांति, मानसिक शांति। शुद्ध प्राकृतिक शहद ही प्रयोग करें। शिवलिंग का चढ़ावा ग्रहण न करें।

#शहद#मधु#शिवलिंग
लोक

त्रयोदशी श्राद्ध में मधु क्यों जरूरी है?

मधु पितरों को प्रिय और तृप्तिदायक है।

#मधु#शहद#त्रयोदशी श्राद्ध
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शहद और फूल क्यों चढ़ाते हैं?

शहद और श्वेत पुष्प तर्पण के ग्राह्य द्रव्य हैं।

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शिव पूजा

शिवलिंग पर शहद चढ़ाने का महत्व क्या है?

शहद चढ़ाने का महत्त्व: शिव पुराण — 'मध्वभिषेकात् वाक्-सिद्धिः।' वाणी में शक्ति और मधुरता। सौंदर्य-वृद्धि (लिंग पुराण)। बुध-ग्रह दोष शांति। प्राकृतिक शहद उपयोग करें। अभिषेक के बाद जल से धोएँ। दूध के साथ न मिलाएँ।

#शिवलिंग#शहद#मधु
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