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स्वाभाविक मृत्यु से जुड़े सभी प्रश्न(4)

स्वाभाविक मृत्यु पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 4 प्रश्न उपलब्ध हैं।

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चतुर्थी को किसका श्राद्ध करें?

चतुर्थी मृत्यु तिथि वाले पितरों का श्राद्ध चतुर्थी को करें।

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चतुर्थी श्राद्ध किसके लिए है?

यह स्वाभाविक रूप से चतुर्थी तिथि को दिवंगत पितरों के लिए है।

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तिथि श्राद्ध

क्या द्वितीया स्वाभाविक मृत्यु वालों के लिए है?

हाँ, द्वितीया श्राद्ध मुख्यतः स्वाभाविक मृत्यु वाले पितरों के लिए है। यदि स्वाभाविक मृत्यु द्वितीया को हुई हो, तो श्राद्ध भी द्वितीया को होगा। परंतु अकाल मृत्यु शस्त्र-विष-दुर्घटना से द्वितीया को हुई हो, तो श्राद्ध चतुर्दशी को होगा। सधवा स्त्री का नवमी को, संन्यासी का द्वादशी को, और तिथि अज्ञात हो तो सर्वपितृ अमावस्या को।

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तिथि श्राद्ध

द्वितीया तिथि को मरे व्यक्ति का श्राद्ध कब होता है?

द्वितीया तिथि को स्वाभाविक रूप से मरे व्यक्ति का श्राद्ध भी द्वितीया तिथि को ही होता है। शुक्ल या कृष्ण दोनों पक्षों में मृत्यु पर समान नियम है। मृत्यु दिन में हुई हो या रात में, मृत्यु के समय जो तिथि थी, वही श्राद्ध तिथि मानी जाती है। परंतु अकाल मृत्यु पर चतुर्दशी, सधवा पर नवमी, और संन्यासी पर द्वादशी को श्राद्ध होगा।

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