मंत्र जप में भाव और विश्वास का कितना महत्व है?
#भाव#विश्वास#महत्व
भाव = प्राण। गीता: 'श्रद्धामयो पुरुषः — जैसी श्रद्धा, वैसा फल।' भाव = 0 → शक्ति = 0। भाव > विधि। 'एक लोटा जल भक्ति से > सवा लाख बिना भक्ति।'
स्रोत प्रश्न: मंत्र जप में भाव और विश्वास का कितना महत्व है? →सनातन धर्म के सभी प्रमुख शब्दों के महत्व।
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