शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भैरव मंत्र
आर्द्रां यः करिणीं यष्टिं सुवर्णां हेममालिनीम्। सूर्यां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारसूर्यवर्णा मंत्र
स्वरूपसूर्या/सुवर्णा
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हे अग्नि! करिणी (गज को धारण करने वाली), स्वर्णमयी और सूर्य के समान तेजोमयी लक्ष्मी का आवाहन करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
राजकीय सम्मान, सत्ता
विस्तृत लाभ
राजकीय सम्मान, सत्ता।
जप काल
सूर्य को अर्घ्य देते हुए।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ पश्चिमे पातु सर्वेशो दिशि मे सर्वतोमुखः
ॐ अनेकशिरसे नमः।
ॐ शुभप्रदा पातु पृष्ठं।
ॐ वल्लीवदनपद्मार्कय नमः
इडा देवहूर्मनुर्यज्ञनीर्बृहस्पतिरुक्थामदानि शंसिषद् विश्वेदेवाः सूक्तवाचः पृथिविमातर्मा मा हिंसीर्मधु मनिष्ये मधु जनिष्ये मधु वक्ष्यामि मधु वदिष्यामि मधुमतीं देवेभ्यो वाचमुद्यासँशुश्रूषेण्यां मनुष्येभ्यस्तं मा देवा अवन्तु शोभायै पितरोऽनुमदन्तु॥
ॐ कपित्थप्रियाय नमः