ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

भैरव मंत्र

काल भैरव, शिव अवतार

233 मंत्र

संतान बाधा निवारण मंत्र

ॐ ह्रीं बटुकाय मम संतान बाधा निवारणं कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा।

क्रूर भैरव मंत्र

क्रीं क्रीं ह्रीं क्रूरभैरव प्रसीद-प्रसीद स्वाहा।

मंत्र

प्रतीच्यां उन्मत्त भैरवाय नमः प्रतीच्यां मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।

नजर दोष निवारण मंत्र

ॐ ह्रीं बटुकाय मम नज़र दोष निवारणं कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा।

लाट भैरव मंत्र

ऐं ह्रीं श्रीं क्रौं हौं ह्रूं क्षूं लाट भैरवाय क्षूं ह्रूं हौं क्रौं श्रीं ह्रीं ऐं नमः।

मंत्र

पूर्वे असितांग भैरवाय नमः पूर्वे मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।

आकाश भैरव मंत्र

खों खं खं फट् प्राण-ग्रासी प्राण-ग्रासी हुं फट् सर्वशत्रुसंहारणां शरभशालुवाय पक्षिराजाय हुं फट् स्वाहा।

असितांग भैरव मंत्र (पूर्व दिशा)

ॐ नमो असितांग भैरवाय स्वाहा।

सिद्ध भैरव आकर्षण मंत्र

नमो भगवते फट् भैरवाय... आकर्षय-२ आवेशय-२ मोहय-२ भ्रामय-२... ह्रां ह्रीं त्रिपुरतांडवाय अष्टभैरवाय भाषय-२ स्वाहा।

मंत्र

ऊर्ध्वे महाकाल भैरवाय नमः ऊर्ध्वे मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।

मनोवांछित कार्य सिद्धि मंत्र

ॐ ह्रीं बटुकाय मम मनोवांछित कार्य सिद्धिं कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा।

नामावली मंत्र

ॐ त्रिलोकपालाय नमः।

भीषण भैरव मंत्र (उत्तर दिशा)

ॐ ह्रीं भीषण भैरवाय सर्व शाप निवारणाय मम वशं कुरु कुरु स्वाहा।

प्रत्यक्ष दर्शन मंत्र

ॐ ह्रीं बटुकाय मम प्रत्यक्ष दर्शय दर्शय बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा।

त्र्यंबक भैरव मंत्र

त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

अकाल मृत्यु निवारण मंत्र

ॐ ह्रीं बटुकाय मम अकाल मृत्यु निवारय निवारय बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा।

मंत्र

दक्षिणे चंड भैरवाय नमः दक्षिणे मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।

भूत भैरव मंत्र

ह्रीं भैरव भयंकरहर मां रक्ष-रक्ष हुं फट् स्वाहा।

महाकाल शत्रुनाशक मंत्र

हुं नमो भगवते महाकाल भैरवाय कालाग्नितॆजसे अमुक शत्रुं मारय-मारय पोथय-पोथय हुं फट् स्वाहा।

शिव भैरव मंत्र

नमो शिव भैरवाय शत्रु नाशाय सर्वभूत दमनाय हुं फट् स्वाहा।

मंत्र

उदीच्यां भीषण भैरवाय नमः उदीच्यां मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।

त्रिपुर भैरव मंत्र

ह्रीं श्रीं हंसः ह्लसौं स्वाहा।

चण्ड भैरव मंत्र (दक्षिण दिशा)

क्रीं क्रीं ह्रीं चण्ड भैरवाय नमः।

नामावली मंत्र

ॐ ज्वलन्नेत्राय नमः।

मंत्र

ॐ भ्रां भ्रां भ्रां भैरवाय नमः।

तंत्र-बाधा निवारण मंत्र

ॐ ह्रीं बटुकाय मम तंत्र बाधा निवारणं कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा।

नामावली मंत्र

ॐ त्रिवृत्ततनयाय नमः।

कपाल भैरव मंत्र (उत्तर-पश्चिम दिशा)

ॐ ह्रीं क्रीं ह्रीं श्रीं कपाल भैरवाय नमः।

ग्रह-बाधा निवारण मंत्र

ॐ ह्रीं बटुकाय मम ग्रह बाधा निवारणं कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा।

सर्व-कष्ट निवारण भैरव मंत्र

ॐ क्लीं वीं रूं ध्रूं घ्नीं ह्रीं बटुक भैरवाय नमः स्वाहा।

स्वप्न दर्शन मंत्र

ॐ ह्रीं बटुकाय मम स्वप्ने दर्शय दर्शय बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा।

संहार भैरव मंत्र (उत्तर-पूर्व दिशा)

ॐ नमो भगवते संहार भैरवाय भूत प्रेत पिशाच ब्रह्म राक्षसान् उच्चाटय उच्चाटय संहारय संहारय सर्व भय छेदनं कुरु कुरु स्वाहा।

गृह क्लेश निवारण मंत्र

ॐ ह्रीं बटुकाय मम गृह क्लेश निवारणं कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा।

स्वर्णाकर्षण भैरव महामंत्र

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं आपदुद्धारणाय ह्रां ह्रीं ह्रूं अजामिलबद्धाय लोकेश्वराय स्वर्णाकर्षणभैरवाय मम दारिद्र्य विद्वेषणाय महाभैरवाय नमः श्रीं ह्रीं ऐं।

कन्या विवाह बाधा निवारण मंत्र

ॐ ह्रीं बटुकाय मम कन्या विवाह बाधा निवारणं कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा।

मंत्र

आग्नेये रूरु भैरवाय नमः आग्नेये मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।

पूर्ण तंत्र सिद्धि मंत्र

ॐ ह्रीं बटुकाय मम पूर्ण तंत्र सिद्धिं कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ नमः शिवाय।

उच्छिष्ट गणपति (भैरव) न्यास मंत्र

ॐ उच्छिष्टगणपति देवतायै नमो हृदि।

महाशास्ता (हरिहरपुत्र) मंत्र

ह्रीं हरिहरपुत्राय पुत्र लाभाय शत्रुनाशाय मदगजवाहनाय महाशास्तये नमः।

मंत्र

नैऋत्ये क्रोध भैरवाय नमः नैऋत्ये मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।

आनंद भैरव मंत्र

ह स ख म ल व र यूं आनंद भैरवाय स्वाहा।

बटुक भैरव आपदुद्धारक मूल मंत्र

ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं।

त्रिकालाग्नि भैरव मंत्र

ऐं ह्रीं श्रीं क्रौं हौं ह्रूं क्षूं त्रिकालाग्नि भैरवाय क्षूं ह्रूं हौं क्रौं श्रीं ह्रीं ऐं नमः।

मंत्र

वायव्ये कपाल भैरवाय नमः वायव्ये मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।

वीरभद्र भैरव मंत्र

वीरभद्राय अतिक्रूराय रुद्रकोप सम्भवाय सर्वदुष्ट निवर्हणाय हुं फट् स्वाहा।

रूरु भैरव मंत्र (दक्षिण-पूर्व दिशा)

रुं ह्रीं रुरवे नमः।

कामेश्वर भैरव मंत्र

ऐं क्लीं सौः श्रीं ह्रीं कामेश्वर ह्रीं श्रीं सौः क्लीं ऐं।

मंत्र

ईशान्यां संहार भैरवाय नमः ईशाने मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।

उग्र भैरव मंत्र

नमो भगवते उग्र भैरवाय सर्वविघ्ननाशाय ठः ठः स्वाहा।

बटुक भैरव वशीकरण मंत्र

ॐ नमो बटुक भैरवाय कामदेवाय यस्य यस्य दृश्यो भवामि यश्च यश्च मम सुखं तं तं मोहयतु स्वाहा।

नामावली मंत्र

ॐ त्रिलोचनाय नमः।

मंत्र

अधो स्वर्णाकर्षण भैरवाय नमः अधो मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।

नामावली मंत्र

ॐ त्रिशिखिने नमः।

क्रोध भैरव मंत्र (दक्षिण-पश्चिम दिशा)

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं ह्रीं क्लीं सर्व विघ्न निवारणाय महा क्रोध भैरवाय नमः।

मंत्र

ॐ हुं ह्रां रां ज्वाल कराल्यै क्रोधश्च काल भैरवाय नमः।

काल भैरव त्र्यक्षरी बीज मंत्र

ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं काल भैरवाय नमः।

काल भैरव गायत्री मंत्र

ॐ कालकालाय विद्महे कालभैरवाय धीमहि तन्नो भैरवः प्रचोदयात्॥

अघोर अस्त्र मंत्र

अघोरेभ्योऽथ घोरेभ्यो घोरघोरतरीभ्यश्च। सर्वतः शर्व सर्वेभ्यो नमस्ते रुद्ररूपेभ्यः॥

उन्मत्त भैरव मंत्र (पश्चिम दिशा)

क्रीं क्रीं भैरवाय क्रीं क्रीं फट्।

भूत-भविष्य दर्शन मंत्र

ॐ ह्रीं बटुकाय मम भूत भविष्यं दर्शय दर्शय बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा।