शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
आकाश भैरव मंत्र
खों खं खं फट् प्राण-ग्रासी प्राण-ग्रासी हुं फट् सर्वशत्रुसंहारणां शरभशालुवाय पक्षिराजाय हुं फट् स्वाहा।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारशत्रु स्तंभन-मारण मंत्र
स्वरूपआकाश भैरव (शरभ स्वरूप)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
प्राणों को ग्रास बनाने वाले पक्षिराज शरभ रूपी भैरव शत्रुओं का संहार करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
भयंकर शत्रुओं का नाश
विस्तृत लाभ
भयंकर शत्रुओं का नाश।
जप काल
गुरु-निर्देशन अनिवार्य 7।
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